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परागण के लिए कई जगहों पर किसान मधुमक्खी पालन करते हैं। ये मधुमक्खियों व्यावसायिक फ़सलों के लिए मुख्य परागणकर्ता होती हैं, लेकिन इसके अलावा जंगली मधुमक्खियों की कई प्रजातियाँ भी परागण का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। इन मधुमक्खियों को कीटनाशकों के संपर्क से बचाने के लिए देखभाल की जानी चाहिए। आज हम जिन खाद्य पदार्थों का उपभोग करते हैं उनमें से कई पदार्थ पौधों से बने होते हैं, जिनके प्रजनन के लिए लगभग ७०% मधुमक्खियों और अन्य कीटों पर निर्भर होते है। कुछ फ़सलों में प्रजनन हवा से भी हो जाता है, लेकिन यदि परागकर्ता ( मधुमक्खियां) मौजूद हैं, अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती हैं।


















मधुमक्खी पालन किसान के लिए उपज बढ़ाने के अलावा आय का वैकल्पिक स्रोत हो सकता है।मधुमक्खी के छत्तो को अच्छी तरह से सूखे क्षेत्र में जहां अधिक संख्या में बागों और पराग के स्रोत हो वहां स्थापित करना चाहिए, मधुमक्खी पालन से सम्बंधित विभिन्न जानकारी जैसे मधुमक्खियों की गुणवत्ता , कालोनियों की स्तिथि, मौसमी प्रबंधन और अन्य सलाह के लिए कृपया निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र से सुझाव लेना चाहिए । भारत सरकार ने "शहद क्रांति" के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिको ने मधुमक्खी पालन और विकास के लिए 2 साल के लिए "राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद योजन (NBHM)" नामक एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी है।


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